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Posted On: 10 Jul, 2016 में

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इंसान की प्रवृति है वह सामान्य
रूप से किसी नए विचार
को नहीं अपनाता,
क्योंकि उसे लगता है वह विचार गलत है या उसे मूर्ख बनाया
जा रहा है , जबकि वह विचार पारिवारिक,सामाजिक,धार्मिक,
आर्थिक,वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक,दार्शनिक,
सांस्कृतिक,राजनीतिक आदि
किसी भी पृष्ठ भूमि का हो
सकता है ,वह पूरा समय लेता है और तब तक दूर रहता है
जबतक वह विचार धारा
उसके जीवन पर असर नहीं
करती और उसका लाभ उसके जीवन को नहीं मिलता हलाकि इंसान जब मुर्ख बनना
पसंद करता है जब वह मनोरंजन करता है क्योंकि वह परास्पर
होता है कुछ दिया कुछ
लिया ,मनोवैज्ञानिक रूप से
इंसान मूर्ख बनना नहीं चाहता , न संबंधों में (विशेष रूप से प्रेम सम्बन्धों में) न सामाजिक ,न आर्थिक,न पारिवारिक,
न धार्मिक,न राजनीतिक आदि ।
इंसान की रूडी प्रवृति है
दूसरे से तुलना (लड़िकयों में ज्यादा हो ती है ) करने की और
अपने आप को बेहतर आंकने की ।
हलाकि लालच और ऑपोसिट सेक्स
सरलता से मूर्ख बना सकती है क्योंकि ऑपोसिट है
और ऑपोसिट का आकर्षण है ।

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